राष्ट्रपति का आदेश कोई राजा का आदेश नहीं: उच्च न्यायालय

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  1. उत्तराखंड में लागू राष्ट्रपति शासन पर नैनीताल उच्च न्यायालय ने बुधवार को कड़ा रुख अख्तियार किया. न्यायालय ने कहा कि राष्ट्रपति कोई राजा नहीं है, और गलती उनसे भी हो सकती है.
  2. पीठ ने कहा, पूर्ण शक्ति किसी को भी भ्रष्ट कर सकती है और राष्ट्रपति भी गलत हो सकते हैं. ऐसे में उनके फैसलों की समीक्षा हो सकती है. सभी न्यायालयों के आदेशों की न्यायिक समीक्षा का अधिकार देश के न्यायालयों के पास है.
  3. उच्च न्यायालय में केंद्र सरकार की ओर से पेश सहायक महाधिवक्ता तुषार मेहता ने कहा कि गोपनीय दस्तावेजों के अनुसार नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट द्वारा राज्यपाल को लिखे पत्र में कहा गया था कि 27 विधायकों ने सदन में शक्ति परीक्षण की मांग की थी, जबकि नौ बागी विधायकों का नाम उसमें नहीं था.
  4. सुनवाई के दौरान न्यायालय ने केंद्र सरकार के अधिवक्ता से पूछा कि उनके द्वारा दिए गए गोपनीय दस्तावेजों पर न्यायालय में चर्चा हो सकती है क्या? न्यायालय ने यह भी पूछा कि क्या उस दस्तावेज का जिक्र आदेश में किया जा सकता है?
  5. इसके बाद न्यायालय ने फिर पूछा कि मंत्रिमंडल के उस निर्णय को सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा सकता? न्यायालय के इस सवाल पर मेहता ने कहा कि इस पर चर्चा की जा सकती है.

#HighCourt #India #Uttrakhand #Congress #BJP #President

By – Mohit Grover

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